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Showing posts from January, 2022

कर्म,पुनर्जन्म तथा ज्योतिष

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  कर्म, पुनर्जन्म तथा ज्योतिष -1 कर्म सिद्धांत तथा पूर्वजन्म पर आधारित है ज्योतिष। कर्म सिद्धांत - भारतीय दर्शन शास्त्र में केवल चार्वाक दर्शन को छोड़कर बाकी सभी कर्म सिद्धांत को मानते हैं। कर्म सिद्धांत जो बोओगे वही काटोगे पर आधारित है। कर्म सिद्धांत सभी कर्मों पर लागू नहीं होता है।यह उन्हीं कर्मों पर लागू होता है जो राग, द्वेष तथा वासना के द्वारा संचालित होते हैं। अर्थात वे  कर्म जो किसी उद्देश्य की भावना से किए जाते हैं कर्म सिद्धांत के दायरे में आते हैं। इसके विपरित वैसे कर्म जो निष्काम किये जाते है। कर्म सिद्धांत द्वारा शासित नहीं होते हैं। निष्काम कर्म भूंजे हुए बीज के समान है जो फल देने में असमर्थ रहते हैं।      न्याय-वैशिषिक दर्शन में कर्म सिद्धांत को अदृष्ट कहा है क्योंकि यह दृष्टिगोचर नहीं है। अदृष्ट का संचालन ईश्वर के आधीन है।  मीमांसा दर्शन के अनुसार कर्म सिद्धांत स्वचलित है इसे संचालित करने के लिए ईश्वर की कोई आवश्यकता नहीं है। स्पष्टतया हम जो कर्म करते हैं उसी आधार पर हमें यह स्वरूप प्रदान होता है। पुनर्जन्म- पुनर्जन्म सिद्धांत की प...

युपी का घमासान-2022

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योगी जी 5/7/1972    10:54:00    पौड़ी गढ़वाल योगी जी की कुंडली सिंह लग्न की है।इस कुंडली में लग्नेश दशम भाव में दिग्बली होकर दशमेश तथा एकादशेश से युत होकर स्थित है।त्रिकोण भावेशों का दृष्टि संबंध है। यहां धर्माधी-कर्माधी पति योग है जिस पर वक्री पंचमेश बृहस्पति की दृष्टि है।    द्वादश भाव स्थित केतु पर शनि की दृष्टि है तथा द्वादशेश सप्तम भाव में सप्तमेश अस्त होकर भोग के बदले संन्यास की प्रवृत्ति प्रदान की 1999 में गोरखपुर मठ  के महंत से दिक्षा ली।दशा- शनि/चंद्र की मिली।  कारकांश लग्न में बुध और शनि दोनों स्थित होकर प्रसिद्ध व्यवसाय वाले शास्त्रिय योग की पुष्टि करते हैं।1998 मे लोकसभा का चुनाव जिते तब धनु/सिंह की दशा थी। सिंह कारकांश लग्न से चतुर्थ भाव की दशा है । कारकांश लग्न में मात्र कारक स्थित है। चुनाव के समय दशा-केतु/गुरु/बुध का समय 16/2/2022 से  5/4/2022 तक रहेगा। महादशा केतु बारहवें भाव में स्थित है जो प्रतिकूल है तथा बृहस्पति बेहतर स्थिति में है क्योंकि यह चतुर्थेश-नवमेश-दशमेश से दृष्टि संबंध में है। प्रत्यंतर दशा बुध की स्थिति भी...