कर्म,पुनर्जन्म तथा ज्योतिष
कर्म, पुनर्जन्म तथा ज्योतिष -1 कर्म सिद्धांत तथा पूर्वजन्म पर आधारित है ज्योतिष। कर्म सिद्धांत - भारतीय दर्शन शास्त्र में केवल चार्वाक दर्शन को छोड़कर बाकी सभी कर्म सिद्धांत को मानते हैं। कर्म सिद्धांत जो बोओगे वही काटोगे पर आधारित है। कर्म सिद्धांत सभी कर्मों पर लागू नहीं होता है।यह उन्हीं कर्मों पर लागू होता है जो राग, द्वेष तथा वासना के द्वारा संचालित होते हैं। अर्थात वे कर्म जो किसी उद्देश्य की भावना से किए जाते हैं कर्म सिद्धांत के दायरे में आते हैं। इसके विपरित वैसे कर्म जो निष्काम किये जाते है। कर्म सिद्धांत द्वारा शासित नहीं होते हैं। निष्काम कर्म भूंजे हुए बीज के समान है जो फल देने में असमर्थ रहते हैं। न्याय-वैशिषिक दर्शन में कर्म सिद्धांत को अदृष्ट कहा है क्योंकि यह दृष्टिगोचर नहीं है। अदृष्ट का संचालन ईश्वर के आधीन है। मीमांसा दर्शन के अनुसार कर्म सिद्धांत स्वचलित है इसे संचालित करने के लिए ईश्वर की कोई आवश्यकता नहीं है। स्पष्टतया हम जो कर्म करते हैं उसी आधार पर हमें यह स्वरूप प्रदान होता है। पुनर्जन्म- पुनर्जन्म सिद्धांत की प...