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Showing posts from August, 2020

Psychological Impact of Worshipping Lord Ganesha

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श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान कहते हैं,जो जिस-जिस देवता का श्रद्धा पूर्वक पूजन करते है।उस उस भक्त को उसी श्रद्धा में स्थिर कर देता हूं।(ज्ञान-विज्ञान योग -21)  भारतीय सनातन धर्म में कई देवी-देवताओं की पूजा - आराधना का प्रावधान है। आप ने कभी सोचा है कि ईश्वर तो एक है,पर फिर हम इसे विभिन्न स्वरूपों में क्यो पूजते हैं? यदि हम ध्यान से इन विभूतियों की मूर्तियों का अवलोकन करें ,तो हमें पता चलेगा कि इनका कितना बड़ा मनोवैज्ञानिक कारण है।  आज हम श्री गणेश जी के बारे में कुछ तथ्यों को जानने का प्रयास करते हैं। गणेश जी का जन्म माता पार्वती के मैल का परिणाम था।जिसे द्वार पर माता ने किसी को भी न आने देने का कार्य सौंपा। चुंकि श्री गणेश मैल से बने थे।अतः उनमें तामसिक प्रवृत्तियां थी।जो किसी का सम्मान न करना ,हठधर्मीता भी थी। ऐसे में उनका वध शिवजी के हाथों होता है।माता पार्वती के अत्यधिक प्रलाप से श्री विष्णुजी के द्वारा गणेश के शरीर पर हाथी का सिर लगाकर उसे जीवित कर दिया जाता है। हाथी मनुष्य के सिर की तुलना में बड़ा तथा जटील होता है। हाथी की स्मृति मनुष्यों की तुलना में कई गुना अधिक होत...

Transit of Sun in current scenario

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सूर्य का सिंह राशि में को प्रवेश को सिंह संक्रांति कहा जाता है। सूर्य सिंह राशि में16 ता.शाम 7बजकर 11 मिनट को प्रवेश कर रहे हैं।उस समय कुंभ लग्न उदित हो रहा है। यहां हम संक्रांति चार्ट का विश्लेषण नहीं कर रहे हैं। सूर्य का राशि परिवर्तन विभिन्न राशियों पर क्या प्रभाव डालता है।इस पर चर्चा करेंगे।      सूर्य स्वयं की राशि में जाकर बली हो रहें हैं,तो वहीं शनि के प्रभाव से भी मुक्त हो रहे हैं। आइये जानते है कि विभिन्न राशियों पर इसका क्या  प्रभाव पड़ सकता है (16 अगस्त-15 सितम्बर 2020 तक)- 1)मेष- संतान संबंधी परेशानी बढ़ सकती है। गलत सोच परेशानियां  बढ़ा सकता है। शांत चित्त अवस्था में निर्णय ले।क्रोध से बचें। 2) वृषभ-माता का स्वास्थ्य तथा स्वयं के सुख में  हानी। सरकारी कार्यों में गलती का भय बना रहेगा। 3) मिथुन-इस राशि वालों के लिए सूर्य लाभ तथा पद प्राप्ती करायेगा।यात्राओं से लाभ ,शत्रु की हार होगी । 4)कर्क-परिवार को कष्ट,धन की हानि हो सकती है।उग्र वाणी संबंधों में गिरावट दे सकती है। 5) सिंह- गुस्से पर नियंत्रण रखें ।वैवाहिक जीवन में बाधा। स्वयं के स्...

Ram vs Krishna

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 सालों पहले किसी ने मुझसे ने एक प्रश्न किया था कि भगवान श्री राम ने एक अबला का परित्याग क्यों किया ।इस प्रश्न से मैं सन्न रह गई, मेरे पास कोई उत्तर नहीं था।       अब मुझे महसूस हुआ कि- श्रीराम तो नियम है, जो सार्वभौमिकता लिए हुए है, अविनाशी अटूट , अखण्ड है। हर परिस्थितियों मे खरा है, जिस प्रकार सूर्य नियमों मे बन्ध कर ब्रह्माण्ड का केंद्र हैं, ठिक उसी प्रकार राम नियमों का केन्द्र है जिससे उत्पन्न ऊर्जा ही सर्वस्व व्याप्त है । राम वह है जो प्रकृति पर नियन्त्रण नहीं वरन् स्वयं  प्रकृति से नियन्त्रित होना सिखाता है।सभी भावनाओं से परे नियम का परिपालन सिखाता है।राम ही आदर्ष तत्व  है, जो हर परिक्षण मे खरा है,प्रकृति के नियन्त्रण मे रह- कर धर्म का परिपालन सिखाता है।              दूसरी ओर श्री कृष्ण जो हर नियम को तोड़ कर धर्म का परिपालन सिखाता है,हर  भावना मे खरा उतरता है।प्रत्येक ममता, स्नेह ,आस्था को स्विकारता है।हर करुण पुकार को पूरा करने सारे नियमो को तोडकर सिर्फ भक्त का हो जाता है।          द...