Ram vs Krishna
सालों पहले किसी ने मुझसे ने एक प्रश्न किया था कि भगवान श्री राम ने एक अबला का परित्याग क्यों किया ।इस प्रश्न से मैं सन्न रह गई, मेरे पास कोई उत्तर नहीं था। अब मुझे महसूस हुआ कि- श्रीराम तो नियम है, जो सार्वभौमिकता लिए हुए है, अविनाशी अटूट , अखण्ड है। हर परिस्थितियों मे खरा है, जिस प्रकार सूर्य नियमों मे बन्ध कर ब्रह्माण्ड का केंद्र हैं, ठिक उसी प्रकार राम नियमों का केन्द्र है जिससे उत्पन्न ऊर्जा ही सर्वस्व व्याप्त है । राम वह है जो प्रकृति पर नियन्त्रण नहीं वरन् स्वयं प्रकृति से नियन्त्रित होना सिखाता है।सभी भावनाओं से परे नियम का परिपालन सिखाता है।राम ही आदर्ष तत्व है, जो हर परिक्षण मे खरा है,प्रकृति के नियन्त्रण मे रह- कर धर्म का परिपालन सिखाता है।
दूसरी ओर श्री कृष्ण जो हर नियम को तोड़ कर धर्म का परिपालन सिखाता है,हर भावना मे खरा उतरता है।प्रत्येक ममता, स्नेह ,आस्था को स्विकारता है।हर करुण पुकार को पूरा करने सारे नियमो को तोडकर सिर्फ भक्त का हो जाता है।
दोनों परम्पराएँ अलग है,पर दोनो का उद्देश्य एक है, धर्म की स्थापना।
श्री राम आदर्श नियम है,तो कृष्ण व्यवहार है।नियम का कभी भी किसी भी परिस्थिति मे न टुटना 'राम' तो परिस्थिति वश सुखद परिणिति का व्यवहार ही'कृष्ण'है।
रामायण नियमों ,कर्तव्यों की गाथा है।इनके परिपालन के लिए प्रिय से प्रिय का परित्याग सिखाता है।
सबसे अच्छी बात यह है कि,जो व्यक्ति अपने ईष्ट को जिस रूप मे देखना चाहता है ,भारतिय दर्शन मे हर वह तत्व मौजूद है।जो स्त्रैण शक्ति/मात्र शक्ति महत्व देता माँ भगवती का स्वरूप सामने आता है।
इसलिए यह सनातनि परम्परा कभी भी नहीं मिट सकती, यह अविरल प्रवाह सदियों पूर्व था, सदियों तक एसा ही बना रहेगा........।।
जय श्री राम 🙏

बहुत सुन्दर व स्पष्ट व्याख्या
ReplyDeleteधन्यवाद श्रुति जी 🙏🏻
DeleteBhaut khoob varnan.
ReplyDeleteधन्यवाद प्रोत्साहन के लिए
Delete🙏🏻🙏🏻