Posts

Showing posts from February, 2022

समस्याएं तथा भगवद्गीता

Image
भगवद्गीता में कुल 18 अध्याय है आज हम श्री भगवद्गीता के पहले अध्याय पर चर्चा करेंगे। गीता रोजगार, जनसंख्या नियंत्रण, प्रदूषण आदि के बारे में कुछ नहीं कहती।यह उस भ्रमित मन की व्याख्या करती है जो हर पल घबराता है। प्रथम अध्याय की शुरुआत में अर्जुन तथा कृष्ण के बीच संवाद होता है, जिसमें अर्जुन को युद्ध में खड़े अपने पितामह , गुरु, कृपाचार्य, अपने भाईयों और रिस्तेदारो के प्रति मोह उत्पन्न होता है और वह युद्ध न करने का निर्णय लेता है ‌ युद्ध के मध्य खड़े अर्जुन मानसिक रूप से भ्रमित हो जाता है तथा निर्णय न लेने की स्थिति में आ जाता है। यही अर्जुन विषाद योग के नाम से जाना जाता है। दोस्तों यह जीवन एक कुरुक्षेत्र है यहां हर पल संघर्ष पैदा होता है तब चुनाव होता है। जैसे क्या करें? तथा क्या न करें ? यह स्थिति हरेक व्यक्ति की निरंतर बनी रहती है। दोस्तों हर व्यक्ति की मूल समस्या यह चुनाव ही है। सत्य-असत्य , धर्म-अधर्म के मध्य सत्य तथा धर्म का चुनाव कैसे करें? यह सिखाती है हमें गीता । आगे अध्यायों में हम इसी को आगे बढ़ाएंगे । किस प्रकार भगवान कृष्ण ने अर्जुन का भ्रम दूर किया वैसे ही आप यदि सच्चे ...

सूर्य राशि परिवर्तन का विभिन्न राशि वालों पर प्रभाव

Image
सूर्य का राशि परिवर्तन तथा विभिन्न राशियों पर उसका प्रभाव- पहले ब्लॉग में हम सूर्य राशि परिवर्तन पर एक सामान्य विश्लेषण प्रस्तुत कर चुके हैं।अब हम विशेष राशियों पर होने वाले शुभ-अशुभ प्रभाव की चर्चा करेंगे। जब सूर्य कुंभ राशि में प्रवेश कर रहा होगा तब गोचर का चंद्रमा मिथुन राशि में रहेगा। शास्त्रों में मुर्ती निर्णय पद्धति द्वारा विभिन्न राशियों पर सूर्य के होने वाले प्रभाव के बारे में उल्लेख किया है।हम उसी को आधार बना कर विशेष जन्म राशि वालों के लिए स्वर्ण पद होने पर - बहुत शुभ, कल्याण प्रद रजत पद होने पर- सामान्य शुभ , संतोष प्रद ताम्र पद होने पर- विलंब,बाधा , किंचित अशुभ लौह पद- बहुत अशुभ तथा अनिष्ट प्रद होने की बात बता रहे है। चुंकि हम सूर्य राशि परिवर्तन की चर्चा कर रहे हैं अतः हमें सुर्य के कारकत्वो पर ध्यान रखना चाहिए। सूर्य सत्ता,राजप्रशासनिक कार्यो, पिता,बाॅस,गाड फादर,राजा,यश, स्वास्थ्य, आरोग्य,प्रशासक, न्याय व्यवस्था ,पद प्राप्ति आदि सूर्य से प्रभावित है। अतः इन क्षेत्रों में उत्थान या पतन होने संभावनाएं रहेंगी। मकर, सिंह, मिथुन - में तीन भाग्यशाली राशियां हैं जो मुर...

Sun enter in Kumbh and it's after effects

Image
कुंभ संक्रांति चार्ट - 13/2/2022 सुबह 3 बजकर 28 मिनट पर सूर्य कुंभ राशि में प्रवेश कर रहे हैं। यहां पर धनु लग्न उदित हो रहा है जो भारतवर्ष की कुंडली का अष्टम भाव है। इस कुंडली में लग्न में दो शुभ ग्रह तथा लग्नेश सूर्य से युत होकर तृतीय भाव में है। शनि द्वितीयेश होकर सप्तमेश-दशमेश से युति में है,यह द्वितीय भाव में है। आर्थिक स्थिति तथा उद्योग धंधे- आर्थिक दृष्टि से देखें तू शनि बुध की युति द्वितीय भाव में है जो राजकोष में वृद्धि कारक रहेगी विदेशी व्यापार से लाभ, कृषि से लाभ ,इसके अलावा मजदूर वर्ग ,मिडियेटर जैसे ब्रोकर आदि के कार्य करने वालों के लिए फायदा रहेगा। जो व्यक्ति लेखन या कलात्मक या रचनात्मक कार्य कर रहे हैं। उनके लिए भी यह महीना अच्छा है। क्योंकि पंचमेश मंगल एकादशेश शुक्र से युत होकर चंद्रमा से दृष्ट है तथा लग्नेश तृतीय भाव में है। स्वास्थ्य - स्वास्थ्य की दृष्टि से देखें तो दो शुभ ग्रह केंद्र में है तथा चंद्रमा भी शुभ प्रभाव में है तथा लग्नेश भी तृतीय भाव में शुभ प्रभाव में है जो देश के उत्तम स्वास्थ्य को इंगित करता है।6, 8,12 भावेशों का प्रभाव ल...

जीवन की सार्थकता

Image
जीवन की यात्रा तब शुरू होती है जब व्यक्ति सोचना शुरू करता है कि जीवन क्या है ? यही सोच आपकी शुरुआत है कि आप सभी जीवों में श्रेष्ठ है।आप के पास वो सब हैं जो आपको भाग्यशाली बनाता है ।मैं कुछ व्यक्तियों से मिली एक का पैर नहीं था किसी की आंखें नहीं , कोई अनाथ है। जीवन में किसी एक के लिए सबसे बड़ा तोहफा यह है कि उसका खोया पैर जिसने उसे अधुरा बनाया है,किसी के आंखों की रोशनी ही मिल जाए तो किसी का आशीर्वाद किसी के जीवन को खुशहाल बनाने के लिए जरूरी है। आपको डिप्रेशन से निकलने के लिए इतना ही काफी है कि आप के पास ये सब है । यदि आप किसी जरूरतमंद की मदद करती है तो आपको केवल डिप्रेशन से ही नहीं निकालेगा वरन किसी को ख़ुशी देने की वजह बनने आपको जीवन के अर्थ की तलाश को खत्म करेगा । जीवन का सही अर्थ है कि आप जीवन की सार्थकता को समझे ।यह सार्थकता ही आपकी यात्रा है। स्वामी विवेकानंद का कथन मुझे बहुत उचित लगता है कि - "यदि तुम्हारा पड़ोसी भूखा है तो मंदिर में प्रसाद चढ़ाना पाप है ।" आपसे जुड़े व्यक्तियों की समस्याओं को समझने का प्रयास करे।

कर्म, पुनर्जन्म तथा ज्योतिष - 2

कर्म,पुनर्जन्म तथा ज्योतिष -2 पुनर्जन्म के बारे में दर्शन शास्त्र में पूर्ण व्याख्या मिलती है। सोचिए की पुनर्जन्म नहीं होता है तब संसार में फैली इस विषमता की व्याख्या कैसे करेंगे।एक व्यक्ति के अच्छे कार्य जैसे - त्याग, बलिदान का क्या पुरस्कार होगा? तो वहीं ऐसे व्यक्ति जो कभी अपने किए पाप, अनैतिक , क्रुर कार्यों का दण्ड भुगत नहीं पाता उनके न्याय कैसे होगा? प्रकृति का संतुलन के लिए कौन जिम्मेदार होगा? एक व्यक्ति धनि परिवार में जन्म लेता है तो वहीं दूसरा व्यक्ति गरीब परिवार में जन्म लेता।एक स्वभाव से दुखी तथा गंभीर होता है तो वहीं दूसरी ओर हंसमुख स्वभाव के व्यक्ति भी होते हैं।कुछ जन्मजात प्रतिभा ले कर उत्पन्न होते हैं तो कुछ अथक प्रयास करने पर भी कुछ हासिल नहीं कर पाते। पुनर्जन्म तथा कर्म सिद्धांत से विषमता की व्याख्या स्वत: हो जाती है। ज्योतिष विधा इसी विषमता को ग्रहों की स्थिति के आधार विश्लेषित करती है। ज्योतिष शास्त्र जब कुंडली की रचना करता है तब जन्म तारीख,समय, स्थान विशेष में स्थित ग्रहों की स्थिति के आधार पर फल कथन करता है । इस प्रकार हर जातक एक निश्चित प्रारब्...