जीवन की सार्थकता

जीवन की यात्रा तब शुरू होती है जब व्यक्ति सोचना शुरू करता है कि जीवन क्या है ? यही सोच आपकी शुरुआत है कि आप सभी जीवों में श्रेष्ठ है।आप के पास वो सब हैं जो आपको भाग्यशाली बनाता है ।मैं कुछ व्यक्तियों से मिली एक का पैर नहीं था किसी की आंखें नहीं , कोई अनाथ है। जीवन में किसी एक के लिए सबसे बड़ा तोहफा यह है कि उसका खोया पैर जिसने उसे अधुरा बनाया है,किसी के आंखों की रोशनी ही मिल जाए तो किसी का आशीर्वाद किसी के जीवन को खुशहाल बनाने के लिए जरूरी है। आपको डिप्रेशन से निकलने के लिए इतना ही काफी है कि आप के पास ये सब है । यदि आप किसी जरूरतमंद की मदद करती है तो आपको केवल डिप्रेशन से ही नहीं निकालेगा वरन किसी को ख़ुशी देने की वजह बनने आपको जीवन के अर्थ की तलाश को खत्म करेगा । जीवन का सही अर्थ है कि आप जीवन की सार्थकता को समझे ।यह सार्थकता ही आपकी यात्रा है। स्वामी विवेकानंद का कथन मुझे बहुत उचित लगता है कि - "यदि तुम्हारा पड़ोसी भूखा है तो मंदिर में प्रसाद चढ़ाना पाप है ।" आपसे जुड़े व्यक्तियों की समस्याओं को समझने का प्रयास करे।

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