कर्म, पुनर्जन्म तथा ज्योतिष - 2

कर्म,पुनर्जन्म तथा ज्योतिष -2 पुनर्जन्म के बारे में दर्शन शास्त्र में पूर्ण व्याख्या मिलती है। सोचिए की पुनर्जन्म नहीं होता है तब संसार में फैली इस विषमता की व्याख्या कैसे करेंगे।एक व्यक्ति के अच्छे कार्य जैसे - त्याग, बलिदान का क्या पुरस्कार होगा? तो वहीं ऐसे व्यक्ति जो कभी अपने किए पाप, अनैतिक , क्रुर कार्यों का दण्ड भुगत नहीं पाता उनके न्याय कैसे होगा? प्रकृति का संतुलन के लिए कौन जिम्मेदार होगा? एक व्यक्ति धनि परिवार में जन्म लेता है तो वहीं दूसरा व्यक्ति गरीब परिवार में जन्म लेता।एक स्वभाव से दुखी तथा गंभीर होता है तो वहीं दूसरी ओर हंसमुख स्वभाव के व्यक्ति भी होते हैं।कुछ जन्मजात प्रतिभा ले कर उत्पन्न होते हैं तो कुछ अथक प्रयास करने पर भी कुछ हासिल नहीं कर पाते। पुनर्जन्म तथा कर्म सिद्धांत से विषमता की व्याख्या स्वत: हो जाती है। ज्योतिष विधा इसी विषमता को ग्रहों की स्थिति के आधार विश्लेषित करती है। ज्योतिष शास्त्र जब कुंडली की रचना करता है तब जन्म तारीख,समय, स्थान विशेष में स्थित ग्रहों की स्थिति के आधार पर फल कथन करता है । इस प्रकार हर जातक एक निश्चित प्रारब्ध लेकर उत्पन्न होता है उस प्रारब्ध को भोगने के लिए भी उसे प्रयास करने पड़ते हैं। हमारे शास्त्रों में इसे छोटी छोटी कहानियों के माध्यम से समझाने का प्रयास किया है। श्रीमद्भागवत पुराण सप्तम स्कन्ध में देवर्षि नारद ने भक्ति की महत्ता की स्थापना के लिए अपने ही पूर्वजन्म का एक वृत्तांत सुनाया कि मैं एक सुन्दर गन्धर्व था। सभी लोग मुझे प्यार करते थे और मेरी स्त्रियां भी मुझमें अनुरक्त थी। एक समय गन्धवों और अप्सराओं से भरी हुई देवसभा में मुझे विष्णुजी के यशगान के लिए बुलाया गया। अपने मोह के कारण मैंने वहां देवताओं को प्रणाम नहीं किया। इससे अपमानित होकर देवताओं ने मुझे शूद्र बनने का श्राप दे दिया। इसके कारण मैं ब्रह्मचारियों की सेविका के जठर से उत्पन्न हुआ। उस जन्म में मैंने महात्माओं की सेवा की और उस सेवा के फल के कारण मैं ब्रह्माजी का पुत्र बना। कर्मों की वजह से नारद जी का पुनर्जन्म होता है। वे अपने प्रारब्ध को स्वीकार कर सबसे अच्छे कर्म करते हैं फलस्वरूप ब्रह्माजी के पुत्र बनते हैं। ज्योतिष शास्त्र भी प्रारब्ध को आधार बनाकर अनुमान लगाता है।हर परिस्थिति में केवल आपके कर्म आपको आगे बढ़ाते है। ज्योतिष तो आपकी परिस्थितियों से अवगत कराता है।

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