समस्याएं तथा भगवद्गीता
भगवद्गीता में कुल 18 अध्याय है आज हम श्री भगवद्गीता के पहले अध्याय पर चर्चा
करेंगे। गीता रोजगार, जनसंख्या नियंत्रण, प्रदूषण आदि के बारे में कुछ नहीं कहती।यह
उस भ्रमित मन की व्याख्या करती है जो हर पल घबराता है। प्रथम अध्याय की शुरुआत में
अर्जुन तथा कृष्ण के बीच संवाद होता है, जिसमें अर्जुन को युद्ध में खड़े अपने
पितामह , गुरु, कृपाचार्य, अपने भाईयों और रिस्तेदारो के प्रति मोह उत्पन्न होता है
और वह युद्ध न करने का निर्णय लेता है युद्ध के मध्य खड़े अर्जुन मानसिक रूप से
भ्रमित हो जाता है तथा निर्णय न लेने की स्थिति में आ जाता है। यही अर्जुन विषाद
योग के नाम से जाना जाता है। दोस्तों यह जीवन एक कुरुक्षेत्र है यहां हर पल संघर्ष
पैदा होता है तब चुनाव होता है। जैसे क्या करें? तथा क्या न करें ? यह स्थिति हरेक
व्यक्ति की निरंतर बनी रहती है। दोस्तों हर व्यक्ति की मूल समस्या यह चुनाव ही है।
सत्य-असत्य , धर्म-अधर्म के मध्य सत्य तथा धर्म का चुनाव कैसे करें? यह सिखाती है
हमें गीता । आगे अध्यायों में हम इसी को आगे बढ़ाएंगे । किस प्रकार भगवान कृष्ण ने
अर्जुन का भ्रम दूर किया वैसे ही आप यदि सच्चे मन से गीता को सुनते तथा समझने का
प्रयास करते हैं निश्चित रूप से उसे उसकी समस्य
Satik. Bahut Badhiya ��������
ReplyDeleteबहुत बहुत धन्यवाद 🙏
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