सावधान रहें : हिन्दू नववर्ष कुंडली
सावधान रहें : हिन्दू नववर्ष कुंडली
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 1 अप्रैल को दोपहर 11:54 पर सूर्य ग्रह चंद्रमा की डिग्री समान अंशों पर हो रही है ।अतः नव वर्ष 1 अप्रैल 2022 को शुक्रवार को दोपहर को रेवती नक्षत्र था एंद्र योग में मिथुन लग्न में प्रवेश करेगा। 2 अप्रैल को प्रतिपदा सूर्योदय के समय होने से नवरात्र की शुरुआत 2 अप्रैल से होगी अतः शास्त्रानुसार राजा वारेश शनि होगा ।मंत्री बृहस्पति होगा क्योंकि सूर्य का मेष राशि में प्रवेश बृहस्पतिवार को हो रहा है।
( 1) हिन्दू नववर्ष प्रवेश के समय मिथुन लग्न बन रहा है। सारे ग्रह कुल 3 भाव में बैठे हैं लग्नेश बुध निच के होकर मार्केश चंद्रमा तथा तृतीयेश सूर्य से युत होकर दशम भाव में है जो पूर्णत अस्त है।इस युति के ये परिणाम हो सकते हैं-
# जनता की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां।
# सरकार की छवि पर प्रश्नचिन्ह खड़े हो सकते हैं। सरकार ्क्क्क अति विश्वास में आकर कुछ ऐसे गलत निर्णय जो उसे नियंत्रित करने में परेशानियां दे सकते हैं। अष्टमेश शनी के दृष्टि पुनः कार्य में बाधा दिखा रही है। सरकार के लिए गए निर्णयों का विरोध हो सकता है।
# लग्नेश तथा तृतीयेश की युति दशम भाव में पुनः सरकार के अथक प्रयासों के साथ सरकार की कुशलता को भी इंगित करती है।
(2) बृहस्पति तथा शुक्र की युति नवम भाव में है तथा बृहस्पति लग्न को दृष्ट भी दृष्ट कर रहे हैं जो सरकार तथा जनता की पुनः खोई हुई शक्ति का संचार करते हुए दिख रहे हैं।
नवम भाव में नवम भाव में पंचमेश सप्तमेश दशमेश तथा द्वादशेश विदेशी व्यापार,विदेशो से समझौतो के साथ न्यायपालिका के लिए यह योग उत्तम है । न्यायपालिका द्वारा सरकार के लिए दिशा निर्देश देना ,महिलाओं के पक्ष में कोई बड़ा फैसला हो सकता है। यहां हिजाब तथा घुंघट संबंधित फैसले महिलाओ के पक्ष में होंगे।
(3) तीसरा सबसे खराब बिंदु यह है कि यहां पर मंगल - शनि क्रमशः षष्ठेश-अष्टमेश होकर अष्टम भाव में स्थित होकर अरिष्ट योग बना रहे हैं शुभ प्रभाव का अभाव है। राशि संघटना चक्र में भी शुभ -अशुभ प्रभाव रहीत है। यहां लग्नेश नीच के तथा नवांश में भी अष्टम भाव में शनि ,मंगल से दृष्ट है। जिसने अरिषटो से बचाव के शक्ति संतुलन को खत्म कर दिया है। इसके परिणाम ये हो सकते हैं -
# हिंसात्मक दौर प्रारंभ हो सकता है। विदेशी ताकतों के टकराव का असर भारत पर भी पड़ सकता है जिससे जान-माल की हानि तथा हानि होने का भय व्याप्त रहेगा।
# सरकार तथा देश के विरुद्ध षड्यंत्र को समझने में भूल तथा उससे संबंधित लिए गए निर्णय देश के लिए अहितकारी हो सकते हैं।
# राजा या किसी बड़े राजनीतिज्ञ की हत्या या हत्या का षड्यंत्र जिसे समझने में हमारे गुप्त चर विभाग भी ना कामयाब रहेंगे।
# एकादशेश तथा नवमेश की युति अष्टम भाव में बन रही है जो गलत तरीके या अनैतिक तरीके से धन प्राप्त करने के संकेत है। मंगल षष्ठेश होकर एकादश भाव , द्वितीय भाव, तृतीय भाव को दृष्ट कर दुस्साहस से धन प्राप्ति का योग निर्मित करते हैं। अष्टमेश किसी प्रकार के घोटालों का संकेत देते हैं। आचार्य वराहमिहिर में ब्रृहद संहिता में शनि के धनिष्ठा नक्षत्र के गोचर फल में कहा है कि धन अधिकारियों की बढ़ोतरी तथा निवेश करता पिछड़ जाता है। यह स्पष्ट होता है कि शेयर मार्केट या फाइनेंस कंपनी या बैंक आदि में घोटाले उनकी क्षमता पर प्रश्नचिन्ह लग सकते हैं ।परासर ऋषि ने धन अधिकारियों के लिए कष्टकारी कहा है। इस प्रकार इस कुंडली में जिस प्रकार जो योग शनि - मंगल द्वितीय - एकादशी भाव पर दृष्टि से बना रहे हैं। वह देश के शेयर मार्केट ,बड़ी फाइनेंस कंपनियां, बैंक आदि की स्थिति के लिए उत्तम नहीं है ।1990 से 1992 तक शेयर घोटाला विख्यात रहा है जिसके पर्दाफाश होने के बाद फरवरी 1993 में फाइनेंसियल गिरावट आई ।इस समय शनि का गोचर धनिष्ठा नक्षत्र पर था। इस पूरे वर्ष 2022 शनी का धनिष्ठा नक्षत्र पर गोचर रहेगा।
खाने ,खदाने और जमीन में छिपे हुए कीमती पत्थरों ,तेल ,गैस, पेट्रोल संबंधित कंपनियों के लिए फायदा हो सकता है।
( 1) हिन्दू नववर्ष प्रवेश के समय मिथुन लग्न बन रहा है। सारे ग्रह कुल 3 भाव में बैठे हैं लग्नेश बुध निच के होकर मार्केश चंद्रमा तथा तृतीयेश सूर्य से युत होकर दशम भाव में है जो पूर्णत अस्त है।इस युति के ये परिणाम हो सकते हैं-
# जनता की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां।
# सरकार की छवि पर प्रश्नचिन्ह खड़े हो सकते हैं। सरकार ्क्क्क अति विश्वास में आकर कुछ ऐसे गलत निर्णय जो उसे नियंत्रित करने में परेशानियां दे सकते हैं। अष्टमेश शनी के दृष्टि पुनः कार्य में बाधा दिखा रही है। सरकार के लिए गए निर्णयों का विरोध हो सकता है।
# लग्नेश तथा तृतीयेश की युति दशम भाव में पुनः सरकार के अथक प्रयासों के साथ सरकार की कुशलता को भी इंगित करती है।
(2) बृहस्पति तथा शुक्र की युति नवम भाव में है तथा बृहस्पति लग्न को दृष्ट भी दृष्ट कर रहे हैं जो सरकार तथा जनता की पुनः खोई हुई शक्ति का संचार करते हुए दिख रहे हैं।
नवम भाव में नवम भाव में पंचमेश सप्तमेश दशमेश तथा द्वादशेश विदेशी व्यापार,विदेशो से समझौतो के साथ न्यायपालिका के लिए यह योग उत्तम है । न्यायपालिका द्वारा सरकार के लिए दिशा निर्देश देना ,महिलाओं के पक्ष में कोई बड़ा फैसला हो सकता है। यहां हिजाब तथा घुंघट संबंधित फैसले महिलाओ के पक्ष में होंगे।
(3) तीसरा सबसे खराब बिंदु यह है कि यहां पर मंगल - शनि क्रमशः षष्ठेश-अष्टमेश होकर अष्टम भाव में स्थित होकर अरिष्ट योग बना रहे हैं शुभ प्रभाव का अभाव है। राशि संघटना चक्र में भी शुभ -अशुभ प्रभाव रहीत है। यहां लग्नेश नीच के तथा नवांश में भी अष्टम भाव में शनि ,मंगल से दृष्ट है। जिसने अरिषटो से बचाव के शक्ति संतुलन को खत्म कर दिया है। इसके परिणाम ये हो सकते हैं -
# हिंसात्मक दौर प्रारंभ हो सकता है। विदेशी ताकतों के टकराव का असर भारत पर भी पड़ सकता है जिससे जान-माल की हानि तथा हानि होने का भय व्याप्त रहेगा।
# सरकार तथा देश के विरुद्ध षड्यंत्र को समझने में भूल तथा उससे संबंधित लिए गए निर्णय देश के लिए अहितकारी हो सकते हैं।
# राजा या किसी बड़े राजनीतिज्ञ की हत्या या हत्या का षड्यंत्र जिसे समझने में हमारे गुप्त चर विभाग भी ना कामयाब रहेंगे।
# एकादशेश तथा नवमेश की युति अष्टम भाव में बन रही है जो गलत तरीके या अनैतिक तरीके से धन प्राप्त करने के संकेत है। मंगल षष्ठेश होकर एकादश भाव , द्वितीय भाव, तृतीय भाव को दृष्ट कर दुस्साहस से धन प्राप्ति का योग निर्मित करते हैं। अष्टमेश किसी प्रकार के घोटालों का संकेत देते हैं। आचार्य वराहमिहिर में ब्रृहद संहिता में शनि के धनिष्ठा नक्षत्र के गोचर फल में कहा है कि धन अधिकारियों की बढ़ोतरी तथा निवेश करता पिछड़ जाता है। यह स्पष्ट होता है कि शेयर मार्केट या फाइनेंस कंपनी या बैंक आदि में घोटाले उनकी क्षमता पर प्रश्नचिन्ह लग सकते हैं ।परासर ऋषि ने धन अधिकारियों के लिए कष्टकारी कहा है। इस प्रकार इस कुंडली में जिस प्रकार जो योग शनि - मंगल द्वितीय - एकादशी भाव पर दृष्टि से बना रहे हैं। वह देश के शेयर मार्केट ,बड़ी फाइनेंस कंपनियां, बैंक आदि की स्थिति के लिए उत्तम नहीं है ।1990 से 1992 तक शेयर घोटाला विख्यात रहा है जिसके पर्दाफाश होने के बाद फरवरी 1993 में फाइनेंसियल गिरावट आई ।इस समय शनि का गोचर धनिष्ठा नक्षत्र पर था। इस पूरे वर्ष 2022 शनी का धनिष्ठा नक्षत्र पर गोचर रहेगा।
खाने ,खदाने और जमीन में छिपे हुए कीमती पत्थरों ,तेल ,गैस, पेट्रोल संबंधित कंपनियों के लिए फायदा हो सकता है।

Badiya ullekh ����
ReplyDeleteधन्यवाद 🙏🌺
DeleteNice ��
ReplyDelete🙏🙏😊😊
DeletePraiseworthy Analysis
ReplyDeleteThank you so much ❤️❤️
DeleteNice analysis
ReplyDeleteThank you Induji❤️❤️🙏🙏
DeleteAmazing insights ��
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