क्या कहती है कि योगी की शपथ ग्रहण कुंडली:
क्या कहती योगी आदित्यनाथ की शपथ ग्रहण कुंडली:
शुभ बिंदु -
# योगी आदित्यनाथ की शपथ ग्रहण के समय सिंह लग्न उदित हो रहा है। # स्थिर लग्न की कुंडली है । # जन्म कुंडली के चंद्रमा से गोचर का चंद्रमा भी एकादश भाव में स्थित है। # लग्न पर बृहस्पति की दृष्टि है जो अरिष्टो का नाश करती है। नवांश तथा दशांश वर्गों के दशम भाव में बृहस्पति स्थित है। # सिंहासन का कारक चतुर्थेश मंगल उच्च के है जो नवमेश भी है # मंगल की लग्न पर दृष्टि जो सख्त प्रशासक की छवि को बरकरार रखेगी। # दशमेश भी षष्ठगत है तथा षष्ठेश से युत है। अड़ियल,सख्त, खूंखार रवैये वाला बनाता है। # तृतीयेश भी षष्ठगत है कार्य करने तरीके भी कठोर होने से अधिनस्थ कर्मचारी परेशान रहेंगे
अशुभ बिंदु -
# जन्म कालिन नक्षत्र से विपत तारा है। # लग्नेश अष्टम भावमें नीच के द्वितीयेश तथा एकादशेश से युत है जो विपरीत स्थितियों में फंसना,तनाव,बाधाओं को इंगित करता है। # चतुर्थेश उच्च के तो है परंतु षष्ठ भाव में षष्ठेश के साथ जो शत्रुओं तथा परेशानियों से घिर कर पूरे समय उनसे लड़ने की स्थिति निर्मित करता है। नवांश में नीच का है। # दशमेश भी षष्ठगत है तथा षष्ठेश से युत है। हर समय शत्रुओं से घिरा रहने वाली स्थिति निर्मित करता है।
निष्कर्षतः
यह कुंडली काफी परेशानियां दिखा रही हैं। योगी जी जन्म कुंडली में लग्नेश दिग्बली है तथा षष्ठेश से युत है परन्तु नवमेश-दशमेश की युति एकादश भाव में बृहस्पति से दृष्ट है। द्वादश भाव स्थित केतु पर शनि की दृष्टि है तथा द्वादशेश सप्तम भाव में सप्तमेश अस्त होकर भोग के बदले संन्यास की प्रवृत्ति प्रदान की । योगी जी की जन्कालिन कुंडली में दशा भी द्वादश भाव में बैठे केतु की नवम्बर 2024 तक रहेगी जो परेशानियां दिखा रही ।
शुभ बिंदु -
# योगी आदित्यनाथ की शपथ ग्रहण के समय सिंह लग्न उदित हो रहा है। # स्थिर लग्न की कुंडली है । # जन्म कुंडली के चंद्रमा से गोचर का चंद्रमा भी एकादश भाव में स्थित है। # लग्न पर बृहस्पति की दृष्टि है जो अरिष्टो का नाश करती है। नवांश तथा दशांश वर्गों के दशम भाव में बृहस्पति स्थित है। # सिंहासन का कारक चतुर्थेश मंगल उच्च के है जो नवमेश भी है # मंगल की लग्न पर दृष्टि जो सख्त प्रशासक की छवि को बरकरार रखेगी। # दशमेश भी षष्ठगत है तथा षष्ठेश से युत है। अड़ियल,सख्त, खूंखार रवैये वाला बनाता है। # तृतीयेश भी षष्ठगत है कार्य करने तरीके भी कठोर होने से अधिनस्थ कर्मचारी परेशान रहेंगे
अशुभ बिंदु -
# जन्म कालिन नक्षत्र से विपत तारा है। # लग्नेश अष्टम भावमें नीच के द्वितीयेश तथा एकादशेश से युत है जो विपरीत स्थितियों में फंसना,तनाव,बाधाओं को इंगित करता है। # चतुर्थेश उच्च के तो है परंतु षष्ठ भाव में षष्ठेश के साथ जो शत्रुओं तथा परेशानियों से घिर कर पूरे समय उनसे लड़ने की स्थिति निर्मित करता है। नवांश में नीच का है। # दशमेश भी षष्ठगत है तथा षष्ठेश से युत है। हर समय शत्रुओं से घिरा रहने वाली स्थिति निर्मित करता है।
निष्कर्षतः
यह कुंडली काफी परेशानियां दिखा रही हैं। योगी जी जन्म कुंडली में लग्नेश दिग्बली है तथा षष्ठेश से युत है परन्तु नवमेश-दशमेश की युति एकादश भाव में बृहस्पति से दृष्ट है। द्वादश भाव स्थित केतु पर शनि की दृष्टि है तथा द्वादशेश सप्तम भाव में सप्तमेश अस्त होकर भोग के बदले संन्यास की प्रवृत्ति प्रदान की । योगी जी की जन्कालिन कुंडली में दशा भी द्वादश भाव में बैठे केतु की नवम्बर 2024 तक रहेगी जो परेशानियां दिखा रही ।

Aati Uttam Vishleshan ����
ReplyDeleteबहुत बहुत धन्यवाद
Delete🙏🙏
Kripya Modi ke baare mein bhi bataiye ����
ReplyDeleteजी कोशिश करुंगी 🙏🙏
DeleteWow Nice!
ReplyDelete🙏🙏🙏❤️
DeleteComprehensive..too good
ReplyDeleteThank you Poornima ji❤️❤️😊
Deletehttps://astrothoughts1.blogspot.com/2022/01/2022.html
ReplyDeleteकृपया योगी जी के बारे में और ज्यादा जानकारी चाहते हैं तो उपरोक्त ☝️ लिंक पर क्लिक करें