Jupiter Transit in current scenario
बृहस्पति गोचर बृहपति 13 अप्रैल 2022 को दोपहर 3:50 में मीन राशि में प्रवेश करेंगे। बृहस्पति अपनी स्वग्रही राशि में गोचर करेंगे। प्राचीन समय में बृहस्पति के राशि परिवर्तन से बनने वाले 1 वर्षीय चक्र को भी संवत्सर कहते थे ।हालांकि इसका प्रयोग केवल घटनाओं के आकलन तक ही सीमित था। आचार्य वराह मिहिर ने बृहस्पति के उदय कालीन से अगले उदय कालीन तक का समय 399 दिन का होता है जिसे एक संवत्सर कहां है। इस समय बृहस्पति मीन राशि में गोचर करेंगे ।अन्य मतानुसार -
मीनेगुरौ- फाल्गुने स्याद्वत्सरः संभवोधन: ।खण्डवृष्टि: महर्घाणि सर्वधान्यानि भूलते।
अर्थात - मीन राशि में आए तो फाल्गुन संवत्सर होता है। उसमें संभव नामक मेघवर्षा करते हैं अर्थात असामान वर्षा होती है एवं सभी प्रकार की धान्य महंगे होंगे। देश के विभिन्न प्रकार के पेचीदा रोगों के कारण लोग या जनता एक स्थान से दूसरे स्थान पर पलायन करेगी ( देश या राज्य)। सरकार के कठोर नियमों से 5 महीने तक भय व्याप्त रहेगा। उसके बाद सुख और धान्य की प्रचुरता रहेगी ।फरवरी-मार्च में राजस्थान गुजरात आदि में महा पीड़ा छात्र भंग अकाल जैसी स्थिति हो सकती है।
लगभग आचार्य वराहमिहिर ने भी फाल्गुन संवत्सर के लिए यही बातें कही है। इसके अलावा देशों में आंतरिक अशांति तथा अंतरराष्ट्रीय राष्ट्रीय घटनाओं में समन्वय बैठाने पर शस्त्र प्रयोग तथा नए कानूनों का सख्ती से पालन करवाना आदि चीजें भी हो सकती है। यह सभी देशों पर लागू होंगे। इस संवत्सर में बृहस्पति सवा दो नक्षत्रों पर गोचर करेंगे साथ ही वक्री होने पर राशि परिवर्तन नहीं हो रहा है।इसे आचार्य वराहमिहिर ने शुभ कहा है।
वर्तमान में विश्व स्तरीय रूस- यूक्रेन युद्ध तथा अन्य घटनाक्रम दिसंबर 2022 तक परेशानी भय तथा शेयर मार्केट में गिरावट के संकेत देते हैं। शासनाध्यक्षों के गलत निर्णय कई परेशानियां दे सकता है। लगभग शनि भी इतने समय तक धनिष्ठा नक्षत्र में रहेंगे जिसके फल इसी प्रकार प्राप्त होंगे । विस्तृत जानकारी हमने नववर्ष कुंडली में भी की है।
विभिन्न राशियों के परिणाम-
बृहस्पति मीन राशि में पूरे सवा दो नक्षत्रों पर भ्रमण कर 22 अप्रैल 2023 को मेष राशि में प्रवेश कर जाएंगे ।मीन राशि में प्रवेश के समय गोचर का चंद्रमा सिंह राशि में रहेगा। आइए जानने का प्रयास करते हैं कि बृहस्पति का गोचर वेध तथा मूर्ति निर्णय पद्धति के साथ क्या परिणाम देगा?
वृषभ ,कर्क, कन्या, कुंभ राशि वालोकी होगी बल्ले- बल्ले
1.मेष राशि/ लग्न - मेष राशि या लग्न वालो के लिए गुरु का गोचर बारहवें भाव में रहेगा जो शुभ और धर्म सम्मत कार्यों में दीन-दुखियों की सहायता हेतु धन खर्च कराता है। कभी कोई जातक पशु, वाहन या मकान के क्रय-विक्रय में बाधा या कठिनाई पाता है। अर्थाभाव के कारण पद प्रतिष्ठा की हानि का भय लगा रहता है। निश्चय ही द्वादश भाव में गुरु का गोचर दुःख, क्लेश और भय दिया करता है। कभी दुष्ट जन या विपत्ति के कारण, धन हानि और प्राण संकट का भय होता है।
मेष राशि में बृहस्पति गोचर में रजत मूर्ति निर्मित करता है अतः यह शुभ फलदाई है ।
2. वृषभ राशि या लग्न - एकादश भाव में गुरु का गोचर धन, वैभव, सफलता तथा मान प्रतिष्ठा देता है। जातक उच्च पद व सत्ता सुख पाता है। उसे पुत्र व मित्रों का श्रेष्ठ सुख मिलता है। निश्चय ही जातक का बल, प्रताप और प्रभाव बढ़ने से शत्रु भयभीत रहते हैं। कोई जातक मंत्र और देवता की उपासना से बहुत लाभ, सुख और उत्कृष्ट सफलता पाता है। घर-परिवार में मंगल उत्सव होने से मन हर्षित रहता है।
दिसम्बर - जनवरी के महिनों में बृहस्पति का वेध सूर्य , बुध ,शुक्र से होगा अतः बृहस्पति के शुभ परिणाम नहीं मिलेंगे अतः दो महीने सावधान रहें।
मूर्ति निर्णय में भी लौह मूर्ति निर्मित कर अशुभ है।
3.मिथुन राशि/लग्न - से बृहस्पति दशम भाव पर गोचर करेंगे।जो धन धान्य की हानि, व्यर्थ की यात्रा तथा बंधु बांधवों से अपमान कराता है। मतान्तर से संतान को रोग व देह कष्ट होता है। कभी भू-संपदा की हानि हुआ करती है। कोई जातक क्षय या फेफड़े के रोग से कष्ट पाता है। ऐसा जातक तीर्थ यात्रा से सुख शान्ति पाता है।
मिथुन राशि वालों के लिए बृहस्पति ताम्र मूर्ति निर्णय निर्मित कर कार्यों में विघ्न तथा बाधाओं से सफलता को इंगित करता है।
4.कर्क राशि या लग्न -इन राशि वालों के लिए नवम भाव में गुरु का गोचर सर्व सौभाग्य और सिद्धि या सफलता प्रदान करता है। वह धन, मान और यश की वृद्धि पाता है। वह परिवार की मर्यादा के अनुकूल व्यवहार करने वाला धार्मिक आस्था से युक्त उदार और परोपकारी होता है। उसे श्रेष्ठ भू-संपदा की प्राप्ति होती है। धार्मिक उत्सवों का आयोजन करने से वह समाज तथा सरकार से सम्मान, सहयोग। और समर्थन पाता है। सूर्य,शुक्र, बुध के वेध से अप्रैल तथा भी महिने बृहस्पति के शुभ परिणाम नहीं प्राप्त होंगे।
मूर्ति निर्णय पद्धति से बृहस्पति कर्क राशि केलिए रजत मूर्ति निर्मित कर अच्छे परिणामों को इंगित करते हैं।
5.सिंह राशि या लग्न- से बृहस्पति अष्टम भाव में गोचर करेंगे।अष्टम भाव में गुरु का गोचर चोर, अग्नि तथा राजा से भय देता है। कभी दुष्कर्म या दुराचार से देह में दुर्बलता होती है तथा धन नष्ट होता है। कोई जातक क्रोध, दुस्साहस व निष्ठुरता के कारण अपयश पाता है। कभी पिता को या स्वयं को मृत्युतुल्य कष्ट होता है तथा पत्नी रोगपीड़ित होती है। मूर्ती निर्णय पद्धति में बृहस्पति स्वर्ण मूर्ति निर्मित करते हैं जो शुभ है उपरोक्त परिणाम में थोड़ी राहत देगा।
6.कन्या राशि या लग्न - इनके लिए बृहस्पति का गोचर सप्तम भाव में होगा जो शुभ है। सप्तम भाव में गुरु का गोचर राजदर्शन से धन व पद प्रतिष्ठा की वृद्धि कराता है। वह स्वस्थ, सदाचारी, धीर गंभीर तथा अभीष्ट कार्य में सफलता पाने वाला होता है। उसे पुत्र और पत्नी का श्रेष्ठ सुख मिलता है। वह आमोदपूर्ण पर्यटन (Pleasure Tour) का लाभ पाता है।
कन्या राशि वाले लौह मूर्ति निर्मित कर अच्छे परिणामों को कम करने का संकेत कर रहे हैं।
सावधान रहें 15/11/2022 से 15/12/2022 तक कोई नया काम न करें।
7.तुला राशि या लग्न - यहां षष्ठ भाव में गुरु का गोचर रोग व्याधि तथा शत्रु की वृद्धि करता है। कोई जातक वरिष्ठ अधिकारियों का कोपभाजन होने से पद प्रतिष्ठा में कमी पाता है। शत्रु के कारण मन में चिंता बनी रहती है। कभी पुत्र या पत्नी से विवाद उग्र रूप ले लेता है। बंधु-बांधव या संबंधियों से मुकदमेबाजी के कारण धन और यश की हानि होती है। कभी आगजनी, चोरी या राजदंड से और सम्मान नष्ट होता है।
मूर्ति निर्णय में स्वर्ण होने से बाधाओं के बाद भी सफलता के संकेत हैं।
8.वृश्चिक राशि या लग्न - यहां बृहस्पति का गोचर पंचम भाव पर होगा।यह शुभ कारी होता है।धन, वैभव तथा ऐश्वर्य की वृद्धि तथा प्रयत्न या प्रयास में सफलता से प्रसन्नता देता है। जातक कार्य कुशल व लक्ष्य के प्रति समर्पित होता है तथा संबंधियों से लाभ और सुख पाता है। सज्जनों की संगति व सहयोग से जातक शत्रुओं को पराजित कर राजा का अनुग्रह पाता है। यह गोचर अवधि जातक को संतान, मित्र तथा उच्च अधिकारियों से स्नेह सहयोग, समर्थन व लाभ देती है। परन्तु कुंभ में शनि का गोचर बृहस्पति के शुभ फलों का वेध करेगा। साथ ही मूर्ति निर्णय में ताम्र मूर्ति बनाकर कार्य में बाधाओं को ही इंगित करेगा।
9.धनु लग्न या राशि-
चतुर्थ भाव में गुरु का गोचर जातक को अर्थाभाव, व्याकुलता, बल-प्रताप की हानि, अपव्यय तथा देश त्याग या विदेश वास से कष्ट क्लेश दिया करता है। कभी बंधु-बांधवों से वैर विरोध अपमान और अपयश होता है। कोई जातक पशु या वाहन से कष्ट पाता है। विद्वानों का मत है कि चंद्रमा से चतुर्थ भाव में गुरु का गोचर जातक को घर परिवार से दूर कर एकाकी बनाता है। कभी वसीयत संबंधी विवाद धन हानि व कलह का कारण बनता है। मूर्ति निर्णय में रजत मूर्ति निर्मित करता है जो शुभ है।
10.मकर राशि या लग्न - तृतीय भाव में गुरु का गोचर स्वजन से वैर विरोध, कार्य में विघ्न बाधा, देह कष्ट, धन का नाश तथा मानसिक संताप देता है। जातक को आर्थिक व सामाजिक स्थिति बिगड़ने का भय लगा रहता है। अनेक विद्वानों ने इस गोचर को महान अनिष्टप्रद व दुःखदायी माना है। कारण -बंधुओं से वैर, दरिद्रता, देह पीड़ा, कलह तथा कार्य नाश से जातक को महान क्लेश हुआ करता है। मूर्ति निर्णय में भी मकर लौह मूर्ति निर्मित कर रहा है जो शुभ नहीं है।
11. कुंभ राशि या लग्न - यहां पर बृहस्पति द्वितीय भाव में गोचर करेंगे। द्वितीय भाव में गुरु का गोचर धन, सौभाग्य कीर्ति व सुख बढ़ाता है। जातक दान, परोपकार व उदारता के कारण कुटुम्ब में स्नेह सम्मान और सुयश पाता है। सभी कार्यों में सफलता मिलती है तथा पत्नी और पुत्र का श्रेष्ठ सुख मिलता है। वह सारगर्भित व सुन्दर वचनों से धन, मान और समर्थन पाता है उसकी धन और कृषि संपदा, इस गोचर में निश्चय ही बढ़ती है। जनवरी - फरवरी के माह में बृहस्पति शुभ परिणाम प्राप्त नहीं होंगे। रजत मूर्ति निर्मित कर अच्छे परिणामों का संकेत है
12. मीन राशि या लग्न - इस राशिपर गुरु का गोचर विदेश यात्रा, अधिक व्यय, वैर विरोध तथा दु:ख देता है। कोई जातक चित्त विक्षेप या मानसिक असंतुलन के कारण राजदंड का भागी बनता है। अपमान और अपयश की संभावना से जातक भयभीत रहता है। मूर्ति निर्णय में मीन राशि लोह मूर्ति निर्मित कर कार्यों में बाधाओं को इंगित करती है।

Bhaut khoob ����
ReplyDeleteआभार सहित धन्यवाद 🙏
DeleteAati Uttam.
ReplyDeleteप्रतिक्रिया के लिए साधुवाद
Delete🙏🙏😊
Amazing ��
ReplyDeleteधन्यवाद ❤️🙏
DeleteWowwww. Beautifully written!✨
ReplyDeleteThank you ❤️☺️
Delete👍
ReplyDeleteसादर धन्यवाद 🙏
DeleteInteresting
ReplyDeleteThank you Poornima ❤️
DeleteWonderful kamla ji
ReplyDelete